बॉडी लैंग्वेज तेज आवाज से सीखे आत्मरक्षा के गुर मौन की शक्ति,तेज आवाज से सुरक्षा,प्रेक्टिस से बच्चों का आत्मविश्वास हुआ दोगुना
मंडीदीप। सामुदायिक पुलिसिंग अंतर्गत एक पहल शक्ति से सुरक्षा की ओर’ सृजन कार्यक्रम के तीसरे दिन बच्चों ने संवाद कौशल में सीखा। यह आयोजन एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज (एएआईएम) के सभागार में प्रतिदिन दोपहर 3 बजे शुरू किया जाता है।आयोजन को मध्यप्रदेश पुलिस, नेटलिंक फाउंडेशन व कृषक सहयोग संस्थान संयुक्त रूप से संचालित कर रहे हैं। आज बच्चों ने मौन का महत्व समझा और तेज आवाज से आत्मरक्षा के तरीके भी सीखे।
जानकारी देते हुए कृषक सहयोग संस्थान के जिला समन्वयक अनिल भवरे ने बताया कि सृजन पुलिस विभाग द्वारा से संचालित बहुउद्देशिय कार्यक्रम है। इसमें अभाव हीन बस्तियों के 100 से अधिक बच्चों को लक्ष्य निर्धारण और आत्मरक्षा के गुर सिखाए जा रहे हैं।
अतिथि वक्ता एड.के के शर्मा ने बच्चों संवाद एक कला है जिसे अभ्यास से विकसित किया जा सकता है। उन्होंने सक्रिय सुनने की कला पर कहा, “बिना सुने बोलने से संवाद का क्रम टूट जाता है। सिर हिलाना, सवाल पूछना और दोहराना सुनने का प्रमाण है।” इससे संवाद का उद्देश्य पूर्ण होता है।
कार्यक्रम के सूत्रधार व वरिष्ठ पत्रकार अनिल भवरे ने बच्चों को प्रभावी संवाद कौशल की बारीकियां सिखाईं। उन्होंने बॉडी लैंग्वेज पर जोर देते हुए कहा, “सीधी कमर, आंखों में नजर मिलाना और हाथों का सकारात्मक इशारा आत्मविश्वास दर्शाता है। झुककर बोलना या आंखें फेरना कमजोरी का संकेत देता है।” उदाहरण स्वरूप, खतरे में मजबूत मुद्रा अपनाने से आक्रांता पीछे हट सकता है।आवाज के उतार-चढ़ाव के महत्व को समझाते हुए भवरे ने डेमो दिया। “एकसमान आवाज नींद ला देती है, लेकिन उतार-चढ़ाव श्रोता को जकड़ लेता है। जोरदार स्वर से ‘नहीं!’ कहना आत्मरक्षा का हथियार है।” उन्होंने अभ्यास कराया, जहां बच्चे अपनी आवाज को नियंत्रित सीखे।
आत्मरक्षा सत्र में कोच विनोद चौधरी ने बच्चों को खतरे में त्वरित निर्णय, मजबूत मुद्रा और सहायता मांगना सिखाया। नेटलिंक फाउंडेशन के आदित्य व्यास ने लक्ष्य निर्धारण पर फोकस किया। आज प्रशिक्षण में 100 से अधिक बच्चे शामिल हुए। यह प्रशिक्षण बच्चों को सशक्त बनासे सुरक्षा की ओर ले जाएगा। अगले सत्र उन्नत ट्रेनिंग पर होंगे।



